माँ चाइनीज हैं इसलिए लोग 'चाइना का माल' और 'हॉफ कोरोना' कहते हैं: ज्वाला गुट्टा

ज्वाला गुट्टा ने बताया कि उन्हें  "चाइना का माल" और "चिंकी" कहके ट्विटर पर ट्रोल किया जाता है जब वह सरकार की कुछ बुराइयां करती हैं। उनकी माँ चाइनीज हैं...

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अक्सर  देखा गया है कि जब हम गोरे और छोटी आँखों वाले लोगों को देखते हैं तो उन्हें चाइनीज़ समझते है फिर चाहे वो नेपाल, भूटान यह अपने ही देश के नार्थ ईस्ट के लोग हो, उन्हें चाइनीज करके सम्बोधित किया जाता है। यह आम लोगों के साथ होता ही है इसके अलावा कई हस्तियों के साथ भी ऐसा होता है। फिर यह हस्ती चाहे खेल की हो या एंटरटेनमेंट की हो। 

चीन से कोरोनावायरस आने पर लोग चाइनीज लोगों को भी एक तरह से वायरस समझने लगे हैं। इसका खामियाजा वह लोग भुगत रहे हैं जो चायनीज नहीं है और उन्हें चाइना का कहके बुलाया जा रहा है। इस बारें पूर्व बैडमिन्टन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने अपना दुःख बताया है। 

ज्वाला गुट्टा ने बताया कि उन्हें  "चाइना का माल", "हाफ चाइनीज" और "चिंकी" कहके ट्विटर पर बहुत ट्रोल किया जाता है जब वह सरकार की कुछ बुराइयां करती हैं। इससे बुरा तो तब होना शुरू हुआ तो जब लोगों ने उन्हें 'हाफ कोरोना' कहके ट्रोल करना शुरू किया।

Jwala Gutta

गुट्टा की माँ हैं चाइनीज  

आपको बता दें कि ज्वाला गुट्टा की माँ चाइनीज है। उनका थोड़ा लुक भी चाइनीज  की तरह दिखता है। इसलिए लोग उन्हें चाइनीज कहके ट्रोल करते हैं। अक्सर देखा गया है कि ज्वाला गुट्टा अक्सर सरकार के खिलाफ ट्विटर पर अपने विचार रखती रहती है यह वजह है कि सरकार के हिमायती लोग उन्हें चाइनीज कहके ट्रोल करते हैं।  

ज्वाला गुट्टा ने आगे बात करते हुए कहा कि जब हम किसी को "कोरोना" या "चीनी वायरस" कहते हैं, तो हम भारतीयों के रूप में यह भूल जाते हैं कि हमारे देश में खुद मलेरिया और टीवी एक महामारी की तरह है. इसकी वजह से यहाँ हर साल करीब 2 लाख से अधिक भारतीय मर जाते हैं। अब, कल्पना कीजिए कि यदि किसी विदेशी देश में किसी भारतीयको "मलेरिया" या "टीबी का रोगी" कहे तो कैसा लगेगा।  

परिवार में भी माँ को चाइनीज होने पर मिला बुरा अनुभव 

ज्वाला गुट्टा ने अपनी माँ के बारें में बात करते हुए कहा कि उनकी माँ ने कभी इस बात की शिकायत नहीं की कि नई संस्कृति में तालमेल बिठाना उनके लिए कितना कठिन था, लेकिन एक मिश्रित विरासत वाले बच्चे के रूप में बड़ा होना उनके लिए आसान नहीं था। 

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ज्वाला गुट्टा आगे बताती हैं कि वह अपनी माँ की तरह मेहनती नहीं हूँ और उन्हें केवल उनकी त्वचा और चीनी खाने की आदतें विरासत में मिली हैं। लेकिन  वह मानती है कि चीनी सबसे ज्यादा मेहनती लोग होते हैं जिन्हें मैं जानती हूं।

उनकी माँ सुबह 8 से शाम 6 बजे तक दवा कंपनियों के लिए एक कंसल्टेंसी चलाती है। उन्हें एक दक्षिण भारतीय परिवार से तालमेल बिठाना पड़ा। शुरू-शुरू में उनके पापा के परिवार ने उनके लुक को स्वीकार नहीं किया। चीन में उनकी माँ भोजन बनाने का काम करती थी। 

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गुट्टा आगे बताती हैं कि जब मैं माँ के पेट में थी उन्हें अच्छा भोजन खाने को नहीं मिलता था। जब गुट्टा का जन्म हुआ तो परिवार में कोई खुश नहीं हुआ क्योंकि सभी बेटा चाहते थे। लेकिन उनके माता-पिता एक-दूसरे के साथ खड़े रेह, इसलिए गुट्टा कहती हैं कि उन्होंने हमारे लिए जो कुछ किया है, उस पर मुझे बहुत गर्व है।