भारतीय टीम में एक ऐसा खिलाड़ी है जो अपनी बैटिंग से भारत को 2026 का टी20 वर्ल्ड जिता चुका है लेकिन अपनी फील्डिंग से उसने बहुत निराश किया है। आइये जानते हैं कि कौन है वह भारतीय खिलाड़ी-
शिवम दूबे: बड़े मुकाबलों के मैच फिनिशर, लेकिन फील्डिंग में सबसे कमजोर कड़ी
जब टीम गहरे दबाव में हो, स्कोरबोर्ड पर रनों की दरकार हो और मैदान में दर्शकों की सांसें थमी हों, तब भारतीय क्रिकेट में एक ऐसा नाम सामने आता है जो अपनी बैटिंग से मैच का रुख पलट देता है।
हालांकि उसकी बैटिंग के स्कोर बहुत बड़े तो नहीं लगते हैं लेकिन वह टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। जी हां, यहाँ बात हो रही है शिवम् दूबे की। वहीं शिवम् दूबे की फील्डिंग बहुत लचर भी है, जिसकी वजह से उनसे बहुत कैच छूटते हैं
बड़े मुकाबलों के संकटमोचक: शिवम् दूबे
शिवम् दूबे ने भारत के लिए महत्वपूर्ण मौकों पर महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। इसमें से कई बार वह नॉट आउट रहे हैं। नीचे उनके स्कोर के बारे में बताया गया है।
1. 2024 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल: 27 (16 गेंदें)
इस ऐतिहासिक खिताबी मुकाबले में टीम इंडिया ने महज 34 रन पर अपने 3 टॉप विकेट गंवा दिए थे। एक छोर से विराट कोहली पारी को संभाल रहे थे, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी स्पिनर्स और तेज गेंदबाज बीच के ओवरों में रन गति पर अंकुश लगा रहे थे। ऐसे नाजुक मोड़ पर क्रीज पर उतरे शिवम दुबे ने दबाव को हावी नहीं होने दिया।
उन्होंने बिना किसी झिझक के एनरिक नॉर्खिया और मार्को यानसेन जैसे गेंदबाजों पर आक्रामक प्रहार किए। उनकी इस 16 गेंदों में 27 रनों की तेज पारी ने भारत के कुल स्कोर को 176 तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई। यही अंत में जीत का अंतर साबित हुआ।
2. 2024 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) क्वार्टर-फाइनल: 37* (22 गेंदें)
घरेलू टी20 टूर्नामेंट के इस नॉकआउट मैच में मुंबई की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ा गई थी और अंतिम ओवरों में जरूरी रन रेट लगातार बढ़ता जा रहा था। जीत के लिए पुख्ता फिनिश की सख्त जरूरत थी।
दुबे ने संकट की इस घड़ी में न केवल एक छोर संभाला, बल्कि शांत दिमाग से गेंदबाजों की लेंथ को भांपते हुए बड़े शॉट्स लगाए।
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22 गेंदों में नाबाद 37 रन बनाकर उन्होंने मुकाबले को आखिरी ओवर के दबाव से निकाला और अपनी घरेलू टीम को शान से सेमीफाइनल का टिकट दिलाया।
3. 2025 एशिया कप फाइनल: 33 (22 गेंदें)
एशिया कप के महामुकाबले में खिताबी जंग के दौरान मध्यक्रम में अचानक दो जल्दी विकेट गिर जाने से भारतीय पारी लड़खड़ा गयी थी। पाकिस्तानी स्पिनर हावी होने की कोशिश कर रहे थे। दुबे ने क्रीज पर आते ही स्पिनरों के खिलाफ अपना आक्रामक रुख अपनाया और मैदान के चारों तरफ गैप तलाशते हुए 22 गेंदों में 33 रनों की बहुमूल्य पारी खेली। इस पारी ने टीम को दबाव से उबारते हुए सम्मानजनक स्कोर तक खड़ा किया।
4. 2026 टी20 वर्ल्ड कप बनाम पाकिस्तान: 27 (17 गेंदें)
भारत-पाक मुकाबले का दबाव हमेशा चरम पर रहता है, और इस मैच में दुबे ने 17 गेंदों पर खेली गई 27 रनों की जुझारू पारी खेली। टी20 क्रिकेट में 27 रनों की पारियां बहुत महत्वपूर्ण होती है वह भी जब 150 के स्ट्राइक रेट से बनाई जाए तो जीत में योगदान देती हैं।

5. 2026 टी20 वर्ल्ड कप बनाम वेस्टइंडीज (करो या मरो मुकाबला): 8* (4 गेंदें)
टूर्नामेंट में बने रहने के लिए यह मुकाबला जीतना अनिवार्य था और मैच आखिरी ओवर की अंतिम गेंदों तक सांसें थाम देने वाले मोड़ पर पहुंच चुका था। भारत को जीत के लिए हर गेंद पर बाउंड्री की दरकार थी और गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी। दुबे ने महज 4 गेंदों में 1 बाउंड्री के सहारे नाबाद 8 रन जोड़कर टीम को जीत की दहलीज के पार पहुंचाया और भारत के वर्ल्ड कप अभियान को जीवंत रखा।
6. 2026 टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल: 43 (25 गेंदें)
वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल जैसे सबसे बड़े मंच पर भारतीय टीम ने मध्य ओवरों में अपने सेट बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे और पारी के पूरी तरह बिखरने का खतरा मंडराने लगा था। ऐसे कठिन समय में शिवम दुबे ने अपने टी20 करियर की सबसे परिपक्व पारियों में से एक खेली।
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उन्होंने 25 गेंदों में 43 रन बनाते हुए मैदान के हर कोने में लंबे छक्के जड़े। इस पारी ने न केवल टीम को बड़े संकट से बाहर निकाला, बल्कि फाइनल में पहुंचने लायक एक विशाल स्कोर की मजबूत नींव भी रखी।
7. 2026 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल: 26* (8 गेंदें)
फाइनल के निर्णायक मुकाबले में अंतिम 2 ओवरों का खेल बचा था और भारत को एक मैच-विनिंग फिनिश की सख्त जरूरत थी ताकि विरोधी टीम के सामने पहाड़ जैसा लक्ष्य रखा जा सके।
दुबे ने डेथ ओवर्स में गेंदबाजों पर कहर बरपा दिया। उन्होंने पहली ही गेंद से कड़ा प्रहार करते हुए महज 8 गेंदों में नाबाद 26 रन ठोक डाले। 325 के अविश्वसनीय स्ट्राइक-रेट से आए इस कैमियो ने मैच का पूरा मनोवैज्ञानिक दबाव न्यूजीलैंड टीम पर डाल दिया और भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में सोने पर सुहागा साबित हुआ।
8. 2026 एशियन गेम्स फाइनल: 27 (15 गेंदें)
स्वर्ण पदक के इस महामुकाबले में धीमी और टर्निंग पिच पर रन बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो रहा था। भारतीय शीर्ष क्रम स्पिन के जाल में फंसकर रन गति खो चुका था। दुबे ने परिस्थितियों को समझते हुए सीधे बल्ले से खेलने की रणनीति अपनाई और स्पिनरों के सिर के ऊपर से बेखौफ शॉट्स लगाए।
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उनकी 15 गेंदों पर 27 रनों की इस तेजतर्रार पारी ने टीम को मुश्किल पिच पर एक फाइटिंग टोटल तक पहुंचाया, जिसके दम पर भारत ने एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
फील्डिंग: जहां छूट जाता है टीम इंडिया का भरोसा

जहां शिवम दुबे ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से टीम में पक्की जगह बनाई है, वहीं बाउंड्री लाइन पर वह अक्सर टीम इंडिया की सबसे कमजोर कड़ी साबित होते हैं। आधुनिक टी20 क्रिकेट में हर एक सिंगल रोकना और नामुमकिन कैच लपकना किसी भी टीम के जीतने का पैमाना बन चुका है, लेकिन दुबे की ग्राउंड की फुर्ती लगातार सवालों के घेरे में रहती है।
मैदान पर उनकी गति और प्रतिक्रिया समय (रिएक्शन टाइम) काफी धीमा नजर आता है। बाउंड्री की तरफ तेजी से जाती गेंद को डाइव लगाकर काटना हो या दो रन को एक रन में तब्दील करना, दुबे अक्सर लड़खड़ाते दिखते हैं। डीप बाउंड्री पर उनका मुड़ना (टर्निंग सर्कल) काफी धीमा है, जिसका फायदा उठाकर विपक्षी बल्लेबाज आसानी से अतिरिक्त रन चुरा लेते हैं।
इतना ही नहीं, अहम मौकों पर हाथ आए आसान कैच टपकाना और मिसफील्डिंग करना ऐसी गलतियां हैं जो किसी बड़े मैच में टीम को हार की कगार पर पहुंचा सकती हैं। जिस भारतीय टीम में विराट कोहली, रवींद्र जडेजा या सूर्यकुमार यादव जैसे चीते जैसी फुर्ती वाले फील्डर मौजूद हों, वहां दुबे की फील्डिंग टीम के पूरे स्टैंडर्ड को नीचे लाती है।
शिवम दुबे को टीम में ऑलराउंडर के तौर पर गिना जाता है, लेकिन कप्तान उनसे नियमित गेंदबाजी नहीं कराते। ऐसे में वह मुख्य रूप से एक विशेषज्ञ मिडिल-ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में खेलते हैं।




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